अकाली दल द्वारा अंतरराज्जीय जल विवाद प्रस्ताव वापिस लेने की अपील, सुखबीर सिंह बादल के नेतृत्व में अकाली प्रतिनिधिमंडल जल शक्ति मंत्री से मिला

Inter State Water Disputes

अकाली दल द्वारा अंतरराज्जीय जल विवाद प्रस्ताव वापिस लेने की अपील, सुखबीर सिंह बादल के नेतृत्व में अकाली प्रतिनिधिमंडल जल शक्ति मंत्री से मिला

Punjab E News :- शिरोमणी अकाली दल ने आज केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह सेखावत को अवगत करवाया कि अंतरराज्जीय जल विवाद संसोधन विधेयक 2019 को इसके मौजूदा  रूप में राज्यसभा में पारित करने से पंजाब के साथ बहुत बड़ी बेइंसाफी होगी। पार्टी ने इस विधेयक को तुरंत वापिस लेने का आग्रह किया है।

पार्टी अध्यक्ष सरदार सुखबीर  सिंह बादल के नेतृत्व में एक अकाली प्रतिनिधिमंडल ने इस संबधी केंद्रीय जल शक्ति मंत्री को नई दिल्ली में मांगपत्र देते हुए इस बात से अवगत करवाया कि इस विधेयक की धारा 12 पंजाब के लोगों खासतौर पर देश की रीढ़ की हड्डी कहे जाने वाले किसानों के लिए यह बहुत ही हानिकारक है। उन्होने कहा कि इंसाफ यह मांग करता है कि धारा 14 में संसोधन करने वाले इस विधेयक के क्लाॅज 12 को पूरी तरह हटा दिया जाए। उन्होने यह भी कहा कि अंतरराज्जीय जल विवाद एक्ट 1956 की धारा 3के तहत् पंजाब राज्य द्वारा 2003 में डाली गई अर्जी पर पिछले 16 साल से कोई सुनवाई नही हुई है।

अकाली दल अध्यक्ष ने कहा कि बदली हुइ परिस्थितियों में यह तथ्य भी शामिल है कि पंजाब में पहले ही पानी की कमी है तथा इसके 80 प्रतिशत पानी के ब्लाॅकों को सरकारी तौर  पर जरूरत से ज्यादा पानी की निकासी करने वाले घोषित किया जा चुका हैजोकि अब खतरे वाले जोनो में शामिल हैं। उन्होने कहा कि इस बात को ध्यान में रखते हुए कि पंजाब कितनी गंभीर हालातों से गुजरा  है तथा यह बहुत ही संवेदनशील सीमावर्ती राज्य हैपंजाब के किसानों को इंसाफ न देना देश के हित में नही होगा।

यह टिप्पणी करते कि पंजाब के केस की दोबारा सुनवाई होनी चाहिएसरदार  बादल ने कहा कि वर्तमान बिल की धारा 12 पंजाब से हुए  अन्याय को जायज करार देने का काम करेगी। उन्होने कहा कि इन अन्यायों में कांग्रेस सरकार द्वारा 1955 में रावी-ब्यास का 8 एमएएफ पानी गैररिपेरीयन राज्य राजस्थान को पानी देने का एकपक्षीय फैसला भी शामिल है। उन्होने  कहा कि कांग्रेस सरकार द्वारा भाखड़ा तथा ब्यास दरिया का पानी बांटने का अधिकार केंद्र को देने के लिए रची साजिश के तहत् 1966 में पंजाब पुर्नगठन  अधिनियम की धारा 78 में संसोधन किया कि यदि दोनों राज्यों में सहमति न हुई तो केंद्र सरकार निपटारा करवाएगी।

अकाली दल अध्यक्ष ने कहा कि 1981 में केंद्र की कांग्रेस सरकार ने पंजाब के कांग्रेसी मुख्यमंत्री को धमकाकर उससे सतलुज-यमुना लिंक परियोजना एक समय सीमा में मुकम्मल करवाने की वचनबद्धता ले ली। इसके अलावा इस प्रोजेक्ट संबधी सरदार परकाश सिंह बादल के नेतृत्व वाली पुरानी सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में डाले  गए एतराजों को वापिस ले लिया।

यह कहते हुए कि यह सभी ऐतिहासिक गलतियां थीसरदार बादल ने कहा कि इनको ठीक करने की आवश्यकता है। उन्होने कहा कि अंतरराज्जीय जल विवाद संसोधन विधेयक 2019 को इसके मौजूदा रूप में पास नही किया जाना चाहिए। इस प्रतिनिधिमंडल में जत्थेदार तोता सिंहप्रोफेसर प्रेम सिंह चंदूमाजरामहेशइंदर सिंह ग्रेवालडाॅ. दलजीत सिंह चीमा तथा  दरबारा सिंह गुरु भी शामिल थे।


Aug 5 2019 8:57PM
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Source: Punjab E News

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