चॉकलेट डे: जानें चॉकलेट का इतिहास और एक खौफनाक सच

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चॉकलेट डे: जानें चॉकलेट का इतिहास और एक खौफनाक सच punjab e news- ऐसा माना जाता है कि चॉकलेट का इतिहास लैटिन अमेरिका से शुरू होता है। मेसोअमेरिका सभ्यता यानी आज के दक्षिण पूर्व मेक्सिको में काकोआ की खेती बड़े पैमाने पर होती थी। काकोआ की बींस यानी कोकोआ बींस से चॉकलेट बनाया जाता है। वैसे यह स्पष्ट तौर पर पता नहीं है कि मेसोअमेरिका सभ्यता के लोग चॉकलेट खाते थे या नहीं। इसका स्पष्ट इतिहास माया सभ्यता के लोगों से शुरू होता है। वे इसी क्षेत्र में करीब 1000 साल पहले यानी 250 ईस्वी से 900 ईस्वी के बीच रहा करते थे। माया सभ्यता के लोग कोकोआ बींस को करंसी के तौर पर इस्तेमाल करते थे। उस समय 10 बींस के बदले अब खरगोश या किसी वेश्या की सेवा हासिल कर सकते थे। 100 बींस से किसी गुलाम को खरीद सकते थे। कुछ धूर्त लोगों ने मिट्टी से जाली बींस भी बना ली थी। 19वीं सदी तक लैटिन अमेरिका के कुछ हिस्सों में बींस को करंसी के तौर पर इस्तेमाल किया जाता रहा। माया सभ्यता के लोग चॉकलेट का इस्तेमाल धार्मिक कर्मकांडों के लिए करते हैं। जैसे जानवरों की बलि दी जाती है, वैसे ही इसको भी बलि के लिए इस्तेमाल किया जाता था। चॉकलेट का इस्तेमाल शादी समारोहों में भी किया जाता है। दुल्हा और दुल्हन एक-दूसरे को चॉकलेट गिफ्ट करते थे। उनका चॉकलेट वाला एक देवता भी था जिनको वे काकाओ गॉड कहते थे। माया सभ्यता के लोग खासतौर पर चॉकलेट का इस्तेमाल पीने के लिए करते थे। सॉलिड चॉकलेट का इस्तेमाल साल 1850 के बाद हुआ है। वैसे माया सभ्यता के लोगों का चॉकलेट तैयार करने का तरीका आधुनिक तरीके से ज्यादा अलग नहीं था। पहले वे बींस की कटाई करते थे। फिर उसे खमीर पड़ने के लिए छोड़ देते थे। इसके बाद उसे सुखाया जाता था। जब बीज सूख जाती थी तो भूनकर उसके छिलके को हटाया जाता था। इस तरह जो बींस मिलती थी, उसे पीसकर पेस्ट बना लेते थे। पेस्ट में गर्म पानी और मसाला मिलाया जाता था। मसाले में मिर्च, वनीला, शहद, फूल आदि शामिल होते थे। इस तरह जो मिश्रण तैयार होता था, उसको दो कंटेनर में डालते-निकालते थे ताकि उसमें झाग पड़ जाए। इस तरह तैयार चॉकलेट को वे पीते थे।
Feb 9 2019 12:08PM
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Source: punjab e news

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