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बमों की बारिश करने वाला हथियार… कैसे ईरान की क्लस्टर बम मिसाइल इजराइल में मचा रही तबाही?

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ईरान और इजराइल की जंग में क्लस्टर बम मिसाइल की चर्चा हो रही है.

ईरान की ओर से इजराइल के खिलाफ क्लस्टर बम मिसाइल का इस्तेमाल हो रहा है. इसके हमले इतने घातक हैं कि इजरायल भी कराह उठा है. ये बम झुंड में आबादी में गिर रहे हैं. इसलिए चर्चा ज्यादा हो रही है. इजराइल ने खुद सोशल मीडिया पर पोस्ट करके इसकी जानकारी दी है और यह भी बताया है कि ये कैसे इसके हमले खतरनाक साबित हो हैं.
युद्ध के बीच यह जानकारी जरूरी है कि आखिर क्या हैं क्लस्टर बम मिसाइल? कैसे काम करती है यह तकनीक? ईरान के पास कहां से आई? यह इजराइल के लिए कितना बड़ा खतरा?

क्लस्टर बम मिसाइल क्या है?

क्लस्टर बम मिसाइल एक खास तरह की मिसाइल होती है. इसके अंदर एक बड़ा वारहेड नहीं होता. कई छोटे छोटे बम भरे होते हैं. इन्हें सबम्यूनिशन या बमलेट कहा जाता है. जब मिसाइल लक्ष्य के पास पहुंचती है तो यह हवा में खुल जाती है. इसके बाद दर्जनों छोटे छोटे बम अलग अलग दिशाओं में बिखर जाते हैं. हर छोटा बम अलग अलग जगह गिरता है और विस्फोट करता है यानी एक मिसाइल, कई जगह धमाका कर सकती है. इसी वजह से इसे बहुत खतरनाक माना जाता है.

साधारण बम और क्लस्टर बम में फर्क

साधारण मिसाइल वह एक ही वारहेड लेकर जाती है. किसी एक जगह पर गिरती है और एक बड़ा धमाका करती है. क्लस्टर मिसाइल क्या करती है? हवा में एक निश्चित ऊंचाई पर खुल जाती है. उसके अंदर के कई छोटे बम बाहर निकलते हैं. ये कुछ किलोमीटर के इलाके में फैल जाते हैं. हर बम अपना अपना धमाका करता है. इसका मतलब यह हुआ कि साधारण मिसाइल एक जगह बड़ा धमाका करती है तो क्लस्टर मिसाइल एक साथ कई जगह धमाके करने में सक्षम है. युद्ध में क्लस्टर मिसाइल बम दुश्मन के बड़े इलाके को नुकसान पहुंचा सकती है. और यही धमाके ईरान, इजराइल के खिलाफ कर कर रहा है.

इजराइली सेना के क्या हैं दावे

इजराइली सेना का दावा है कि ईरान ने क्लस्टर म्यूनिशन वाली बैलिस्टिक मिसाइल दागी हैं. इनमें से कम से कम एक मिसाइल ने इजराइल के सेंट्रल हिस्से पर हमला किया. एक मिसाइल करीब सात किलोमीटर की ऊंचाई पर खुली. उसने लगभग 20 सबम्यूनिशन छोड़े. ये करीब 8 किलोमीटर के दायरे में फैल गए. एक बमलेट तेल अवीव के पास आज़ोर नाम के कस्बे में एक घर पर गिरा. घर को नुकसान हुआ, लेकिन वहां मौत नहीं हुई. कुल मिलाकर हमलों में कई लोग घायल हुए और काफी संपत्ति का नुकसान हुआ. इजराइली सेना ने आम लोगों को चेतावनी दी कि जमीन पर पड़े अनफटे बम बहुत खतरनाक हैं.

क्लस्टर मिसाइल कैसे लांच की जाती है?

क्लस्टर मिसाइल ज़मीन या मोबाइल लॉन्चर से छोड़ी जाती है. कुछ मिसाइलें जहाज़ या पनडुब्बी से भी छोड़ी जा सकती हैं. मिसाइल बैलिस्टिक या गाइडेड रास्ते पर आगे बढ़ती है. उसके अंदर कंप्यूटर और सिस्टम लगे होते हैं. ये सिस्टम तय करते हैं कि किस ऊंचाई पर वारहेड को खोलना है. लक्ष्य के ऊपर या पास पहुंचकर मिसाइल का वारहेड खुलता है. यह काम आमतौर पर कुछ किलोमीटर ऊंचाई पर होता है. वारहेड से छोटे छोटे बम बाहर निकलते हैं.
ईरान की कुछ मिसाइलें 20 से लेकर 80 तक सबम्यूनिशन छोड़ सकती हैं. हर सबम्यूनिशन में कुछ किलो विस्फोटक होता है. यह इतनी ताकत रखता है जितनी किसी छोटे रॉकेट या मोर्टार शेल में होती है. सबम्यूनिशन अलग अलग जगह गिरते हैं. कई बम जमीन पर लगते ही फट जाते हैं. कई बार कुछ बम नहीं फटते और वहीं पड़े रहते हैं और यहीं से सबसे बड़ा खतरा शुरू होता है.

अगर बम नहीं फटा तो भी खतरा

क्लस्टर बम का सबसे खतरनाक पहलू अनफटे सबम्यूनिशन हैं. कुछ प्रतिशत सबम्यूनिशन गिरने पर नहीं फटते. ये वर्षों तक जमीन में या सतह पर पड़े रह सकते हैं. किसी के पैर पड़ने, बच्चे के उठाने, किसान के हल चलाने या किसी झटके से फट सकते हैं. इस तरह ये बम युद्ध खत्म होने के बाद भी जिंदा खतरा बने रहते हैं. ये मिनी लैंडमाइन की तरह काम करने लगते हैं. कई देशों में युद्ध के सालों बाद भी क्लस्टर बम के अनफटे टुकड़े मिलते हैं. हर साल ऐसे बमों से सिविलियंस घायल होते रहते हैं. इसी वजह से क्लस्टर म्यूनिशन पर अंतरराष्ट्रीय बहस और विरोध बहुत ज्यादा है.

ईरान के पास यह तकनीक कहां से आई?

ईरान आधिकारिक तौर पर अपने क्लस्टर हथियार कार्यक्रम के बारे में ज्यादा नहीं बताता लेकिन खुले स्रोतों से कुछ बातें सामने आती हैं. ईरान ने कई बैलिस्टिक मिसाइलें खुद विकसित की हैं. इनमें ज़ुल्फ़िकार, क़ादर, ख़ोर्रमशहर आदि प्रमुख हैं. मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि कादर मिसाइल क्लस्टर वारहेड ले जा सकती है और लगभग दो हजार किलो मीटर तक मार कर सकती है. ईरान की कई मिसाइलें सोवियत स्कड डिज़ाइन पर आधारित हैं. इसमें क़ियाम का नाम प्रमुखता से लिया जाता है.
डिफेंस एक्सपर्ट्स के हवाले से जो तथ्य मीडिया रिपोर्ट्स में सामने आ रहे हैं, उसके मुताबिक ईरान की क्लस्टर क्षमता के पीछे रूस या चीन की टेक्नॉलजी हो सकती है. लेकिन यह पुख्ता जानकारी नहीं है. केवल आशंका है क्योंकि चीन-रूस के पास पहले से उन्नत क्लस्टर वारहेड तकनीक है. ईरान के पास सोवियत डिजाइन वाले केएमजीयू डिस्पेंसर हैं, जो सबम्यूनिशन गिराने के लिए बने हैं. ब्रिटेन के बने बीएल755 जैसे क्लस्टर बम भी ईरान के पास बताए जाते हैं.

इजराइल के लिए कितना बड़ा खतरा?

इजराइल सैन्य रूप से मजबूत देश है. उसके पास आयरन डोम, डेविड्स स्लिंग, एरो जैसी उन्नत मिसाइल रक्षा प्रणालियाँ हैं, फिर भी क्लस्टर मिसाइलें कुछ खास तरह के खतरे पैदा करती हैं. तेल अवीव और उसके आसपास घनी आबादी है. अगर कई सबम्यूनिशन एक साथ गिरें तो कई मोहल्लों में एक साथ धमाके हो सकते हैं. इससे घायल और नुकसान की संख्या बढ़ सकती है, भले ही हर धमाका छोटा हो. अनफटे बम सालों तक खतरा रहेंगे. अगर ईरान एक ही दिन में कई बैराज दागता है, और उनमें से कुछ क्लस्टर वारहेड हैं, तो इजराइली सिस्टम को तय करना पड़ेगा कि किस मिसाइल को पहले मार गिराया जाए. क्लस्टर वारहेड वाली मिसाइल अक्सर खास प्राथमिकता बन जाती है, क्योंकि उसका असर इलाके पर बहुत फैला हुआ होता है. कुल मिलाकर, इजराइल के लिए यह खतरा तकनीकी भी है और मानवीय भी.सीधे सैन्य नुकसान के साथ साथ नागरिकों की सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और आर्थिक गतिविधियों पर गहरा असर पड़ सकता है.

कन्वेंशन ऑन क्लस्टर म्यूनिशन के बारे में भी जानें

क्लस्टर म्यूनिशन को लेकर 2008 में एक बड़ी संधि बनी. इसे कन्वेंशन ऑन क्लस्टर म्यूनिशन (Convention on Cluster Munitions) के नाम से जाना जाता है. कुल 111 देश और 12 अन्य संस्थाएं इस संधि से जुड़े हैं. इन देशों ने ऐसे हथियारों का इस्तेमाल, उत्पादन, ट्रांसफर और भंडारण रोकने की बात मानी है लेकिन न ईरान ने यह संधि साइन की है, न ही इजराइल ने इसे साइन किया है. अमेरिका भी इस संधि का हिस्सा नहीं है. यूक्रेन युद्ध के दौरान भी क्लस्टर बमों पर बहस तेज हुई है. अमेरिका ने यूक्रेन को ऐसे हथियार दिए, जबकि रूस पर भी इनके इस्तेमाल के आरोप लगते रहे हैं. इसका मतलब यह हुआ कि क्लस्टर बम केवल ईरान इजराइल का मुद्दा नहीं हैं. ये पूरी दुनिया के लिए मानवाधिकार, मानवीय कानून और युद्ध की नैतिकता से जुड़ा बड़ा सवाल हैं.

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