Home Latest News भारत-अमेरिका व्यापार समझौता भारतीय कृषि को तबाह कर देगा: Kuldeep Dhaliwal

भारत-अमेरिका व्यापार समझौता भारतीय कृषि को तबाह कर देगा: Kuldeep Dhaliwal

16
0

कुलदीप धालीवाल ने यह भी स्पष्ट किया कि आम आदमी पार्टी इस मुद्दे पर बिल्कुल भी चुप नहीं है।

पंजाब की आम आदमी पार्टी (आप) ने रविवार को भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की कड़ी निंदा करते हुए इसे किसान विरोधी, खतरनाक और राष्ट्र विरोधी करार दिया।
पार्टी का आरोप है कि यह समझौता भारतीय कृषि व्यवस्था को गंभीर नुकसान पहुंचाएगा और देश के लाखों किसानों को आर्थिक तबाही की ओर धकेल देगा। यह समझौता देश के किसानों के हितों की अनदेखी करते हुए विदेशी कृषि उत्पादों के लिए भारतीय बाजार खोलने का प्रयास है।
पंजाब आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता कुलदीप धालीवाल ने इस मुद्दे पर भाजपा पर सीधा हमला बोला।
उन्होंने कहा कि भाजपा नेता सुनील जाखड़ इस समझौते का जश्न मना रहे हैं, जबकि वे या तो इसके विनाशकारी परिणामों को समझ नहीं पा रहे हैं या जानबूझकर भारत के गरीब और सीमांत किसानों पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को छिपा रहे हैं।
धालीवाल ने कहा कि यह समझौता किसानों के हितों के खिलाफ है और इससे कृषि क्षेत्र में असमान प्रतिस्पर्धा पैदा होगी।
कुलदीप धालीवाल ने यह भी स्पष्ट किया कि आम आदमी पार्टी इस मुद्दे पर बिल्कुल भी चुप नहीं है। उन्होंने कहा कि सुनील जाखड़ का यह कहना गलत है कि आप ने इस समझौते पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। धालीवाल के अनुसार, समझौते की घोषणा के बाद से ही पार्टी पिछले 10 दिनों से लगातार इसका विरोध कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने देश को अंधेरे में रखा और प्रधानमंत्री संसद में इस गंभीर विषय पर जवाब देने से बचते रहे।
‘आप’ प्रवक्ता ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की जानकारी देश को प्रधानमंत्री या सरकार की ओर से नहीं, बल्कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से मिली। ट्रंप ने अपने बयानों में बार-बार ‘कृषि’ शब्द का इस्तेमाल किया है, जो हर भारतीय किसान के लिए चिंता का विषय होना चाहिए और यह संकेत देता है कि इस समझौते का सीधा असर भारतीय कृषि पर पड़ेगा।
धालीवाल ने कहा कि आम आदमी पार्टी की चिंता बिल्कुल साफ और गंभीर है। यह समझौता भारत के बाजारों को भारी सब्सिडी प्राप्त अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए खोल देता है, जिससे उन भारतीय किसानों को सीधा नुकसान होगा, जिन्हें पहले से ही पर्याप्त सरकारी समर्थन नहीं मिल रहा है।
उन्होंने इसे भारतीय किसानों के लिए असमान और अन्यायपूर्ण प्रतिस्पर्धा बताया।
लाल ज्वार का उदाहरण देते हुए धालीवाल ने कहा कि इसका करीब 75 प्रतिशत उत्पादन अमेरिका में होता है, जबकि भारत में इसकी खेती मुख्य रूप से महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त इलाकों में गरीब किसान करते हैं, जहां न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कोई ठोस गारंटी नहीं है। ऐसे में अगर अमेरिकी लाल ज्वार भारतीय बाजार में आया, तो देश के किसानों के लिए अपनी उपज बेच पाना बेहद मुश्किल हो जाएगा।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि अमेरिकी लाल ज्वार, मक्का, अन्य अनाज और दुग्ध उत्पाद भारतीय बाजारों में भर गए, तो देश की स्वदेशी फसलें पूरी तरह बर्बाद हो जाएंगी। इसका सीधा असर पंजाब, हरियाणा, कर्नाटक, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के किसानों पर पड़ेगा, जहां के किसान पहले ही कई चुनौतियों से जूझ रहे हैं।
धालीवाल ने सवाल उठाया कि यदि सब्सिडी वाला अमेरिकी कपास भारत में आया तो देश के कपास किसानों का क्या होगा। इसी तरह, अगर अमेरिकी बादाम और अखरोट बाजार में छा गए तो जम्मू-कश्मीर के किसान कैसे टिक पाएंगे। हिमाचल प्रदेश और कश्मीर के सेब उत्पादकों के सामने सस्ते अमेरिकी सेबों से मुकाबला करना बेहद कठिन होगा। इसके साथ ही उन्होंने दुग्ध उत्पादों और अन्य कृषि उत्पादों के भविष्य को लेकर भी गंभीर चिंता जताई।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here