पंजाब के गुरिंदरवीर सिंह ने भारतीय एथलेटिक्स में एक नया इतिहास बना दिया है।
पंजाब के गुरिंदरवीर सिंह ने भारतीय एथलेटिक्स में एक नया इतिहास बना दिया है। रांची में आयोजित 2026 एथलेटिक्स फेडरेशन कप में उन्होंने पुरुषों की 100 मीटर दौड़ में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। गुरिंदरवीर ने यह रेस केवल 10.09 सेकंड में पूरी की और नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बना दिया। इस उपलब्धि के साथ वह 100 मीटर दौड़ में 10.10 सेकंड से कम समय निकालने वाले पहले भारतीय एथलीट बन गए हैं। उनकी इस बड़ी सफलता के बाद पूरे पंजाब और देशभर में खुशी का माहौल है। खेल प्रेमी और युवा खिलाड़ी उन्हें प्रेरणा के रूप में देख रहे हैं।
लगातार दो दिनों में तोड़े रिकॉर्ड
गुरिंदरवीर सिंह ने सिर्फ फाइनल में ही नहीं, बल्कि पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने लगातार दो दिनों में राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़कर सभी को हैरान कर दिया। सेमीफाइनल में बेहतरीन समय निकालने के बाद उनका आत्मविश्वास और बढ़ गया था, जिसका असर फाइनल रेस में साफ दिखाई दिया। उनकी तेज रफ्तार और मेहनत ने भारतीय एथलेटिक्स को एक नई पहचान दिलाई है। अब उनसे अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी शानदार प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने दी बधाई
भगवंत मान ने गुरिंदरवीर सिंह की इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए सोशल मीडिया पर उन्हें बधाई दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरिंदरवीर ने नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाकर पंजाब का नाम देश और दुनिया में रोशन किया है। उन्होंने कहा कि पंजाब के युवा लगातार खेलों में आगे बढ़ रहे हैं और गुरिंदरवीर की सफलता आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा बनेगी। मुख्यमंत्री ने इसे पूरे पंजाब के लिए गर्व का पल बताया।
परिवार को बेटे की सफलता पर गर्व
गुरिंदरवीर की मां रूपिंदर कौर ने बेटे की सफलता पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि पूरा परिवार बेहद गर्व महसूस कर रहा है। उन्होंने बताया कि रिश्तेदार और जान-पहचान वाले लगातार फोन करके बधाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि गुरिंदरवीर बचपन से ही बहुत मेहनती और खुशमिजाज था। उसके कोचों ने भी उसे आगे बढ़ाने में काफी मेहनत की। मां ने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि उन्हें पढ़ाई और खेल दोनों पर ध्यान देना चाहिए और नशे जैसी बुरी आदतों से दूर रहना चाहिए।
वहीं उनके पिता कमलजीत सिंह ने बताया कि गुरिंदरवीर पिछले कई वर्षों से लगातार मेहनत कर रहा है। उन्होंने कहा कि वह खुद भी वॉलीबॉल खिलाड़ी रहे हैं और हमेशा चाहते थे कि उनका बेटा खेलों में नाम कमाए। आज बेटे की सफलता ने उनका सपना पूरा कर दिया।
कोच ने बताया मेहनत और संघर्ष की कहानी
गुरिंदरवीर के कोच सरबजीत सिंह ने कहा कि खिलाड़ी ने पिछले 10 वर्षों में बहुत कठिन मेहनत की है। उन्होंने बताया कि गुरिंदरवीर रोजाना घंटों अभ्यास करता था और हमेशा खुद को बेहतर बनाने की कोशिश करता था। कोच ने कहा कि सेमीफाइनल में रिकॉर्ड टूटने के बाद उसका आत्मविश्वास काफी बढ़ गया था। फाइनल में उसने जिस तरह की दौड़ लगाई, वह भारतीय एथलेटिक्स के इतिहास में हमेशा याद रखी जाएगी।उन्होंने यह भी कहा कि गुरिंदरवीर की सफलता से पंजाब के कई युवा खिलाड़ियों को प्रेरणा मिलेगी और वे भी खेलों में आगे बढ़ने के लिए मेहनत करेंगे।
युवाओं के लिए बने प्रेरणा
गुरिंदरवीर सिंह की यह सफलता सिर्फ एक खिलाड़ी की जीत नहीं, बल्कि मेहनत, अनुशासन और लगन की मिसाल है। उन्होंने साबित कर दिया कि अगर लक्ष्य बड़ा हो और मेहनत सच्ची हो, तो कोई भी सपना पूरा किया जा सकता है। आज गुरिंदरवीर सिंह पूरे देश के युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं और हर भारतीय को उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर गर्व है।