चंडीगढ़ नगर निगम से जुड़े स्मार्ट सिटी फंड में लगभग 116.84 करोड़ रुपये की गड़बड़ी का मामला सामने आया है।
पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आरोप है कि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के खाते से निकाली गई राशि को 11 फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) के रूप में दिखाया गया, लेकिन जांच के दौरान ये एफडी फर्जी पाई गईं।
पुलिस ने शुरुआती जांच के आधार पर नगर निगम में आउटसोर्स के जरिए नियुक्त अकाउंटेंट अनुभव मिश्रा और ऋभव ऋषि के साथ ही आईडीएफसी बैंक सेक्टर-32 के पूर्व मैनेजर को आरोपी बनाया है। इसके अलावा बैंक के कुछ अन्य कर्मचारियों और नगर निगम के कुछ अज्ञात अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में बताई जा रही है।
स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट समाप्त होने के बाद सामने आया मामला
जानकारी के अनुसार जनवरी 2026 में स्मार्ट सिटी परियोजना का कार्यकाल समाप्त होने पर परियोजना के खाते में करीब 116.84 करोड़ रुपये शेष थे। अधिकारियों ने निर्णय लिया कि यह राशि नगर निगम के खाते में स्थानांतरित कर दी जाए। बाद में इस धनराशि को एफडी में निवेश करने की बात कही गई और 11 एफडी बनाकर अकाउंट ब्रांच में जमा दिखा दिया गया।
हालांकि, लंबे समय तक इन एफडी की विस्तृत जांच नहीं की गई। बाद में जब रिकॉर्ड की समीक्षा की गई तो पता चला कि दिखाए गए एफडी दस्तावेज असली नहीं हैं।
कुछ बैंक कर्मचारियों के नाम पहले भी घोटाले में आ चुके हैं
सूत्रों के अनुसार मामले में जिन बैंक कर्मचारियों के नाम सामने आए हैं, उनमें से कुछ का नाम हरियाणा में सामने आए लगभग 540 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले में भी जुड़ चुका है। पुलिस अब इन कर्मचारियों से पूछताछ कर पूरे नेटवर्क को समझने की कोशिश कर रही है।
एक और व्यक्ति पर संदेह
मामले में विकास वधावा नाम के एक व्यक्ति का नाम भी चर्चा में है। बताया जा रहा है कि उसका स्मार्ट सिटी कार्यालय (सेक्टर-17) और नगर निगम कार्यालय में लगातार आना-जाना था और वह अधिकारियों से मुलाकात करता रहता था। पुलिस उसके संभावित संबंधों की भी जांच कर सकती है।
आउटसोर्स कर्मचारी के गायब होने के बाद बढ़ा शक
घोटाले का खुलासा उस समय हुआ जब स्मार्ट सिटी परियोजना में काम कर रहा एक आउटसोर्स कर्मचारी अभिनव अचानक लापता हो गया। इसके बाद रिकॉर्ड की जांच की गई तो सामने आया कि 116.84 करोड़ रुपये की 11 एफडी फर्जी हैं। अब यह भी जांच का विषय है कि नगर निगम के बैंक खातों से जुड़ी संवेदनशील जानकारी और पासवर्ड आउटसोर्स कर्मचारी तक कैसे पहुंचे।
बैंक ने राशि की भरपाई की
बताया जा रहा है कि बैंक की आंतरिक नीति के तहत आईडीएफसी बैंक ने नगर निगम को इस राशि की भरपाई कर दी है, ताकि ग्राहकों का भरोसा बना रहे। हालांकि बैंक कर्मचारियों और अन्य संबंधित लोगों की भूमिका को लेकर जांच अभी जारी है।