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Punjab के बड़े उद्योगपति से करोड़ों की साइबर ठगी: महिला आरोपी गिरफ्तार, ED की 11 राज्यों में बड़ी कार्रवाई

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ED ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक महिला आरोपी को गिरफ्तार किया है।

 लुधियाना के मशहूर उद्योगपति एसपी ओसवाल से करोड़ों रुपये की साइबर ठगी के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक महिला आरोपी को गिरफ्तार किया है। इस केस में ईडी की जालंधर टीम ने पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात और असम समेत कुल 11 स्थानों पर एक साथ छापेमारी की, जिसमें कई अहम सबूत सामने आए हैं।
ईडी अधिकारियों के अनुसार, यह मामला वर्ष 2023 का है, जब लुधियाना निवासी उद्योगपति एसपी ओसवाल को ठगों ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) का अधिकारी बनकर फोन किया। फर्जी दस्तावेजों और डराने-धमकाने की रणनीति अपनाकर उन्हें तथाकथित “डिजिटल अरेस्ट” में रखा गया और अलग-अलग बैंक खातों में करोड़ों रुपये ट्रांसफर करवा लिए गए।
साइबर सेल में दर्ज हुई FIR
घटना के बाद पीड़ित उद्योगपति ने साइबर सेल में शिकायत दर्ज करवाई, जिसके आधार पर जांच शुरू की गई। जांच के दौरान सामने आया कि इसी गिरोह से जुड़े डिजिटल अरेस्ट और साइबर ठगी के मामलों में पहले से दर्ज नौ अन्य एफआईआर को भी इस केस से जोड़ा गया है।
7 करोड़ रुपये की ठगी का खुलासा
ईडी की जांच में पता चला कि आरोपियों ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर और जाली न्यायिक दस्तावेज दिखाकर एसपी ओसवाल से करीब 7 करोड़ रुपये विभिन्न खातों में ट्रांसफर करवाए। इसके बाद यह रकम अलग-अलग म्यूल खातों में भेजी गई, जिनमें कुछ खाते श्रमिकों और डिलीवरी बॉय के नाम पर भी खोले गए थे। कई खातों से रकम तुरंत नकद निकाल ली गई या आगे ट्रांसफर कर दी गई।
रूमी कलिता की भूमिका
जांच में यह भी सामने आया कि ठगी की रकम को डाइवर्ट करने में रूमी कलिता नाम की महिला की अहम भूमिका थी। वह म्यूल खातों के क्रेडेंशियल उपलब्ध कराती थी और बदले में धोखाधड़ी की रकम का एक हिस्सा लेती थी।
गिरफ्तारी और रिमांड
ईडी ने तलाशी के दौरान 23 दिसंबर 2025 को रूमी कलिता को पीएमएलए के तहत गिरफ्तार किया। इसके बाद कामरूप (एम), गुवाहाटी की सीजेएम कोर्ट से 4 दिन का ट्रांजिट रिमांड लिया गया। आरोपी को बाद में जालंधर की विशेष पीएमएलए अदालत में पेश किया गया, जहां उसे 2 जनवरी 2026 तक 10 दिन की ईडी हिरासत में भेज दिया गया।
इससे पहले 31 जनवरी 2025 को भी इस मामले में छापेमारी की गई थी, जिसमें कई आपराधिक दस्तावेज और डिजिटल सबूत जब्त किए गए थे।
जांच जारी
प्रवर्तन निदेशालय का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में इस साइबर ठगी नेटवर्क से जुड़े और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।

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