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US-Israel-Iran War: सीजफायर पर ईरान की 3 बड़ी शर्तें, UNSC में युद्ध रोकने की उठी मांग

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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पास किया है।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पास किया है जिसमें ईरान से खाड़ी (गल्फ) देशों और जॉर्डन पर हो रहे हमलों को तुरंत रोकने की मांग की गई है। यह प्रस्ताव गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) के देशों की पहल पर लाया गया था। यह प्रस्ताव बहरीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पेश किया। बहरीन ने इसे अपने साथ गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) के अन्य देशों कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात तथा जॉर्डन की ओर से रखा था। GCC के इन देशों और जॉर्डन का कहना है कि क्षेत्र में बढ़ते हमले और तनाव को तुरंत रोकना जरूरी है।
यह प्रस्ताव “रेजोल्यूशन 2817 (2026)” के नाम से पास किया गया। इसे सुरक्षा परिषद के 15 में से 13 सदस्यों का समर्थन मिला। किसी भी देश ने इसके खिलाफ वोट नहीं दिया। चीन और रूस ने इस पर वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया (मतदान से दूर रहे)।
इस प्रस्ताव को 135 देशों का समर्थन मिला, जिन्होंने इसे सह-प्रायोजित (co-sponsor) किया। यह संख्या संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के इतिहास में किसी भी प्रस्ताव के लिए सबसे ज्यादा मानी जा रही है। इससे पता चलता है कि बड़ी संख्या में देश चाहते हैं कि क्षेत्र में तनाव कम हो और हिंसा तुरंत रोकी जाए। दूसरी ओर, ईरान के मीनाब शहर में एक प्राथमिक स्कूल पर हुए मिसाइल हमले को लेकर शुरुआती जांच में अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया गया है।
यह हमला 28 फरवरी को हुआ था। इस हमले में टॉमहॉक क्रूज मिसाइल का इस्तेमाल किया गया, जिससे स्कूल की इमारत को नुकसान पहुंचा। हमले के समय अमेरिकी सेना पास में मौजूद एक ईरानी नौसैनिक अड्डे को निशाना बना रही थी।
अमेरिकी सैन्य जांच में सामने आया है कि यह हमला गलती से हुआ। जांच के अनुसार, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने खुफिया एजेंसियों से मिले पुराने टार्गेटिंग डेटा का इस्तेमाल किया था। इसी पुराने डेटा के आधार पर जिस इमारत को निशाना बनाया गया, उसे सैन्य ठिकाना समझ लिया गया, जबकि वहां अब एक प्राथमिक स्कूल चल रहा था। जांच में यह भी पता चला कि जिस जगह पर स्कूल था, वह पहले ईरानी नौसैनिक अड्डे का हिस्सा रहा था। बाद में वहां स्कूल बना दिया गया था, लेकिन सैन्य रिकॉर्ड में पुरानी जानकारी अपडेट नहीं हुई थी। इसी वजह से अमेरिकी सेना ने उस जगह को अभी भी सैन्य परिसर समझ लिया और मिसाइल हमला कर दिया।

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