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रसोई से सड़क तक महंगाई की मार! टॉरेंट गैस ने 2.50 रुपए महंगी की सीएनजी

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Torrent Gas ने कंप्रेस्ड नेचुरल गैस की कीमतें 2.50 रुपए प्रति किलोग्राम बढ़ा दी हैं.

कमर्शियल गैस सिलेंडर और एयर टर्बाइन फ्यूल की कीमतों में इजाफा होने के बाद सीएनजी की कीमतों में भी इजाफा होना शरू हो गया है. इस बार टॉरेंट गैस ने सीएनजी की कीमतों में इजाफा किया है. इससे पहले नायरा ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इजाफा किया था. वैसे अभी तक सरकारी कंपनियों की ओर से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है. मौजूदा समय में कच्चे तेल की कीमतों में 110 डॉलर प्रति बैरल हो गई है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर टॉरेंट गैस ने सीएनजी की कीमतें कितनी कर दी हैं.

2.50 रुपए का इजाफा

Torrent Gas ने शहर में कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (CNG) की कीमत में 2.50 रुपए प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी की है. इस बढ़ोतरी से लोगों में फ्यूल की बढ़ती कीमतों को लेकर चिंता बढ़ गई है. कुछ स्थानीय लोगों ने कहा कि इस बढ़ोतरी से उनके रोजमर्रा के खर्चों में और इजाफा होगा. वहीं ऑटो-रिक्शा चालकों ने कम होते मुनाफे के कारण अपनी कमाई पर पड़ने वाले दबाव की बात कही. यह बदलाव ईंधन की कीमतों में हो रही व्यापक बढ़ोतरी के बीच आया है. 1 अप्रैल से, प्रमुख शहरों में कमर्शियल LPG सिलेंडर की दरें बढ़ा दी गईं. साथ ही एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई.

कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी

CNG की कीमतों में यह बदलाव देशभर में फ्यूल की कीमतों में हुई लगातार बढ़ोतरी के बाद आया है. 1 अप्रैल से, कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों में भारी बढ़ोतरी की गई. दिल्ली में अब 19 किलोग्राम का सिलेंडर 195.50 रुपए की बढ़ोतरी के बाद 2,078.50 रुपए का मिल रहा है. 5 किलोग्राम वाले छोटे सिलेंडर भी महंगे हो गए हैं, जबकि घरेलू LPG की दरें मार्च में हुई हालिया बढ़ोतरी के बाद से अपरिवर्तित बनी हुई हैं.

क्यों हो रहा है इजाफा?

ग्लोबल फैक्टर्स, विशेष रूप से पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की सप्लाई रूट्स (जिसमें Strait of Hormuz भी शामिल है) में आई बाधाओं के कारण ईंधन की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं. ऊर्जा की लागत में हुई इस बढ़ोतरी ने एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों को भी ऊपर धकेल दिया है, जिससे एयरलाइंस और हवाई किरायों पर असर पड़ा है. इन बढ़ोतरी का मिला-जुला असर परिवहन से लेकर हॉस्पिटैलिटी तक, सभी क्षेत्रों में महसूस किया जा रहा है. व्यवसाय और उपभोक्ता, दोनों ही बढ़ती परिचालन लागतों से जूझ रहे हैं.

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