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Lawrence Bishnoi गैंग पर FBI ने कसा शिकंजा: जेल से चला रहा 9 देशों में मौत का कारोबार, कितना बड़ा है क्राइम नेटवर्क?

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अमेरिका की FBI और न्याय विभाग ने लॉरेंस बिश्नोई समेत 37 आरोपियों पर अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध सिंडिकेट चलाने का आरोप लगाया है.

अमेरिका की FBI ने गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और उसके साथियों पर शिकंजा कसा है. FBI ने लॉरेंस पर नवंबर 2023 में कनाडा में खालिस्तानी अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का आदेश देने का आरोप लगाया है. एजेंसी ने लॉरेंस समेत 37 आरोपियों के खिलाफ अमेरिकी फेडरल कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की है, जिन पर भारत से चलाए जा रहे तीन इंटरनेशनल क्राइम सिंडिकेट से जुड़े होने का आरोप है. अमेरिका, कनाडा और यूरोप की एजेंसियों ने ऑपरेशन हार्डबॉल नाम से चलाए गए एक जॉइंट ऑपरेशन में 24 लोगों को गिरफ्तार किया है. ये गिरफ्तारियां नॉर्थ अमेरिका और यूरोप से हुई हैं.
इन गैंग्स पर अपहरण, रंगदारी, रैकेट चलाना, अवैध हथियारों की तस्करी, ड्रग्स तस्करी और हत्या जैसे गंभीर आरोप हैं. अधिकारियों के मुताबिक, अभी भी 10 आरोपी फरार हैं. इनमें 7 अमेरिका में, 2 भारत में और 1 यूरोप में छिपा हुआ है. आइए जानते हैं इस गैंग के साम्राज्य, काम करने के तरीके और इन पर हुई अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई की कहानी. यह भी जानेंगे कि क्या अब भारत की जेल में बंद लॉरेंस बिश्नोई और जग्गू भगवानपुरिया को अमेरिका ले जाया जाएगा.

कितना बड़ा है लॉरेंस गैंग, क्या है इसका कारोबार?

FBI के मुताबिक, लॉरेंस बिश्नोई गैंग सिर्फ हत्याओं तक सीमित नहीं है, बल्कि एक पूरी तरह से संगठित कॉरपोरेट माफिया की तरह काम कर रहा है.

गैंग का मुख्य कारोबार

  • कॉन्ट्रैक्ट किलिंग: गैंग पैसे और वर्चस्व के लिए नेताओं, हस्तियों और विरोधियों की हत्या करता है (जैसे सिद्धू मूसेवाला और हरदीप सिंह निज्जर की हत्या).
  • ड्रग्स तस्करी: गैंग ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोकीन और मेथामफेटामाइन की तस्करी का बड़ा नेटवर्क बना रखा है. FBI के मुताबिक, इन्होंने विरोधी गैंग्स का करीब 520 किलोकोकीन लूटा और अमेरिका से कनाडा तक ट्रकों में छिपाकर ड्रग्स की सप्लाई की.
  • अंतरराष्ट्रीय रंगदारी: भारतीय मूल के विदेशी व्यापारियों को वॉट्सऐपजैसे एन्क्रिप्टेड ऐप्स के जरिए जान से मारने की धमकी देकर करोड़ों डॉलर की रंगदारी मांगी जाती है.
  • हथियारों की तस्करी: सीमा पार से ड्रोन्स के जरिए हथियारों और विस्फोटकों की तस्करी करना इस गैंग का मुख्य काम है.

कितने देशों में नेटवर्क, कैसे ऑपरेट करता है?

इन अपराधियों का नेटवर्क भारत तक सीमित नहीं है. अमेरिका के न्याय विभाग के मुताबिक, इनका साम्राज्य अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, यूरोप (स्पेन, फ्रांस), मैक्सिको, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड तक फैल चुका है.

ऑपरेट करने का तरीका

भले ही लॉरेंस बिश्नोई भारत की जेल में बंद है, लेकिन वह जेल के अंदर से ही ‘वॉयस-ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल’ (VoIP) और स्मगल किए गए मोबाइल फोन के जरिए दुनिया भर में अपना गैंग चला रहा है. उसने अलग-अलग देशों की जिम्मेदारी अपने खास गुर्गों को बांट रखी है:

1. गोल्डी बराड़: नॉर्थ अमेरिका का सरगना

सतिंदरजीत सिंह उर्फ गोल्डी बराड़ बिश्नोई गैंग का नॉर्थ अमेरिका (अमेरिका और कनाडा) में सबसे बड़ा ऑपरेटर है. वह लॉरेंस बिश्नोई के निर्देशों पर विदेश में गैंग की गतिविधियां चलाता था. उस पर हत्या, रंगदारी, ड्रग्स तस्करी और गैंग के सदस्यों के बीच तालमेल बनाने के आरोप हैं. भारतीय मूल के कारोबारियों को धमकाकर रंगदारी वसूलने का भी आरोप है. FBI ने उस पर 50,000 डॉलर का इनाम भी घोषित किया है.

2. रोहित गोदारा: यूरोप में गैंग का मुखिया

रोहित गोदारा यूरोप में लॉरेंस गैंग का नेटवर्क संभालता था. वह यूरोप में गैंग के लोगों से संपर्क बनाए रखता था. इसके साथ ही रंगदारी, हथियारों की तस्करी व दूसरी आपराधिक गतिविधियों को ऑपरेट करता था.

3. रविंदर सिंह ढांडा: ड्रग्स तस्करी का मास्टरमाइंड

रविंदर सिंह ढांडा उर्फ रैंडी, रोलेक्स और जॉन विक कनाडा के वैंकूवर का रहने वाला है. अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, वह कनाडा आधारित इंटरनेशनल ड्रग्स सिंडिकेट का सरगना है. उस पर अमेरिका से कनाडा तक हर हफ्ते सैकड़ों किलो कोकीन और मेथामफेटामाइन की तस्करी कराने का आरोप है. ड्रग्स को ट्रकों और छिपे हुए सामान के जरिए सीमा पार पहुंचाया जाता था. इस मामले में उसके समेत 11 लोगों पर अमेरिका में केस दर्ज किया गया है.

किन आरोपों में केस दर्ज हैं, किन देशों ने कार्रवाई की?

इस गैंग पर भारत के अलावा अमेरिका और कनाडा में बेहद गंभीर आपराधिक और आतंकी मामले दर्ज किए गए हैं. भारत में इन पर हत्या, फिरौती और आतंकी गतिविधियों के केस दर्ज हैं. भारत सरकार ने गोल्डी बराड़ को UAPA (गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम) के तहत आतंकवादी घोषित किया है. फ्रांस स्थित इंटरपोल ने भी इसके खिलाफ ‘रेड कॉर्नर नोटिस’ जारी किया हुआ है.

अमेरिका और कनाडा के आरोप

FBI और अमेरिकी न्याय विभाग ने (DOJ) ने जुलाई 2026 में इनके खिलाफ तीन अलग-अलग फेडरल चार्जशीट दायर की हैं.
  • कनाडा में निज्जर की हत्या: अमेरिका का सीधा आरोप है कि जून 2023 में कनाडा के सरे में खालिस्तानी अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का आदेश लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ ने ही दिया था.
  • RICO और हॉब्स एक्ट: गैंग पर ‘रैकेटीयर इन्फ्लुएंस्ड एंड करप्ट ऑर्गनाइजेशंस’ (RICO) साजिश, ड्रग्स तस्करी, किडनैपिंग, और ‘हॉब्स एक्ट’ के तहत रंगदारी मांगने के आरोप लगे हैं.
  • कनाडा का एक्शन:

    कनाडा सरकार ने सितंबर 2025 में ही बिश्नोई एंटरप्राइज को एक आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया था.

लॉरेंस गैंग के कितने मेंबर जेल में और कितने बाहर हैं?

माना जाता है कि अकेले भारत में लॉरेंस के गिरोह में 700 से ज्यादा शूटर्स हैं, जिनमें 300 से ज्यादा पंजाब से जुड़े हैं. अमेरिकी नेतृत्व में हुए ‘ऑपरेशन हार्ड बॉल’ ने लॉरेंस के इंटरनेशनल गैंग्स की कमर तोड़ दी है. कुल 37 अपराधियों पर चार्जशीट दाखिल की गई है.
  • गिरफ्तारियां: इस ऑपरेशन के तहत नॉर्थ अमेरिका और यूरोप से 24 लोगों को गिरफ्तार किया गया है (11 कैलिफोर्निया में, 1 इंडियाना में, 1 जॉर्जिया में, 3 कनाडा में और 1 स्पेन में). 7 अपराधी पहले से ही हिरासत में थे.
  • फरार: गोल्डी बराड़ सहित 10 अपराधी अभी भी फरार हैं.
जग्गू भगवानपुरिया का नेटवर्क: जग्गू भगवानपुरिया फिलहाल भारत की जेल में बंद है. पहले वह लॉरेंस का करीबी था, लेकिन बाद में दोनों के बीच दुश्मनी हो गई. जग्गू भगवानपुरिया का अपना अलग सिंडिकेट है, जिसमें दुनिया भर में 1,000 से ज्यादा मेंबर्स हैं और अकेले अमेरिका में इसके 100 से अधिक गुर्गे सक्रिय हैं. जग्गू ने भारत में भ्रष्ट पुलिस अधिकारियों से सांठ-गांठ करके आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दिया है.

क्या लॉरेंस और जग्गू को US ले जाया जाएगा?

अमेरिकी न्याय विभाग ने अपनी चार्जशीट में लॉरेंस बिश्नोई और जग्गू भगवानपुरिया को उनके सिंडिकेट्स का सरगना मानते हुए मुख्य आरोपी बनाया है. चूंकि अमेरिका की फेडरल कोर्ट में इन पर हत्या, अंतरराष्ट्रीय रंगदारी और बड़े पैमाने पर ड्रग्स तस्करी के आरोप औपचारिक रूप से तय हो चुके हैं, इसलिए अमेरिका इन दोनों के प्रत्यर्पण की कानूनी प्रक्रिया जरूर शुरू करेगा.
हालांकि, दोनों भारत की हाई-सिक्योरिटी जेलों में बंद हैं और भारत की जांच एजेंसियों (NIA) के मुकदमों का सामना कर रहे हैं. अगर अमेरिका प्रत्यर्पण की मांग करता है, तो पहले भारत में उससे जुड़ी कानूनी और अदालत की प्रक्रिया पूरी होगी. इसके बाद भारत सरकार भारतीय कानून और भारत-अमेरिका के बीच हुई प्रत्यर्पण संधि के नियमों के आधार पर तय करेगी कि आरोपी को अमेरिका भेजा जाए या नहीं.

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