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Chandigarh- घोटाले की रकम से खरीदी लग्जरी गाड़ियां:इनमें ₹4.30 करोड़ की मर्सिडीज जी-वैगन, रेंज रोवर, BYD सील शामिल, पुलिस ने जब्त कीं

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चंडीगढ़ नगर निगम में 200 करोड़ के स्मार्ट सिटी घोटाले में नए खुलासे हुए हैं।

घोटाला करने वाले आरोपियों ने इनसे लग्जरी गाड़ियां खरीदीं। जिनमें मर्सिडीज की जी-वैगन, रेंज रोवर और BYD सील शामिल हैं। इसका खुलासा तब हुआ, जब घोटाले की जांच के दौरान पता चला कि ये गाड़ियां भी करप्शन की रकम से ही खरीदी गई थी। इसके बाद पुलिस ने इन गाड़ियों को कब्जे ले लिया है। यह तीनों गाड़ियां चंडीगढ़ पुलिस के सेक्टर-17 स्थित इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (EOW) के थाने में खड़ी हैं। यह मामला जांच के लिए अब CBI को ट्रांसफर हो चुका है। हालांकि गाड़ियों को अभी थाने में ही रखा गया है। जिनका खुलासा अब हुआ है।
स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में भी करोड़ों का घोटाला।
स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में भी करोड़ों का घोटाला।
जानिए, किस आरोपी से कौन सी लग्जरी गाड़ी मिली:-
  • पुलिस के मुताबिक चंडीगढ़ रिन्यूएबल एनर्जी एंड साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रमोशन सोसायटी (क्रेस्ट) के प्रोजेक्ट डायरेक्टर सुखविंदर सिंह अबरोल को लग्जरी गाड़ियों का कुछ ज्यादा ही शौक था। पुलिस को अबरोल के कब्जे से मर्सिडीज-बेंज एएमजी जी-63 लग्जरी गाड़ी मिली। जिसकी कीमत 4.30 करोड़ रुपए है। खास बात ये है कि इस मॉडल की मर्सिडीज ने पूरे देश में सिर्फ 30 ही कारें बनाई थी। इसके अलावा अबरोल के पास BYD सील इलेक्ट्रिक कार भी मिली, जिसकी शुरुआती कीमत करीब 40 लाख रुपए है।
  • पुलिस को रेंज रोवर ऑटोबायोग्राफी कार भी मिली है। यह होटल कारोबारी विक्रम वाधवा की बताई जा रही है, जो इसी घोटाले के केस में जेल में बंद है। जांच एजेंसियों का कहना है कि वाधवा और IDFC फर्स्ट बैंक के कुछ कर्मचारियों-अधिकारियों ने मिलकर क्रेस्ट और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में करीब 200 करोड़ रुपए का घोटाला किया था।
CBI इन्हें अहम सबूत मान रही CBI के सूत्रों के मुताबिक बरामद की गईं गाड़ियां भ्रष्टाचार की रकम से खरीदी गई थीं। इसी वजह से इन्हें केस की अहम प्रॉपर्टी माना जा रहा है और फिलहाल रिलीज करने का कोई फैसला नहीं लिया गया है। जांच एजेंसियों का मानना है कि आय से अधिक संपत्ति और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच में ये वाहन अहम भूमिका निभाएंगे।
जानिए, कैसे किया था पूरा घोटाला:- CBI सूत्रों के मुताबिक स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के लिए आई ग्रांट की रकम IDFC फर्स्ट बैंक में FD के रूप में जमा थी। प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद यह रकम नगर निगम को ट्रांसफर होनी थी। मगर, उससे पहले ही यह रकम रियल एस्टेट कारोबार में निवेश कर दिया गया। इसके लिए आरोपियों ने फर्जी FD रसीदें तैयार कर सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर की। इसी तरह क्रेस्ट में भी सरकारी फंड का दुरुपयोग किया गया। अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने बैंक के कर्मचारियों से मिलीभगत कर जाली कंपनियां बनाईं। फिर इस सरकारी रकम को अलग-अलग जगह इन्वेस्ट कर दिया।
घोटाले में अब तक ये आरोपी पकड़े जा चुके पुलिस के मुताबिक इस मामले में अब तक स्मार्ट सिटी की पूर्व चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर नलिनी मलिक, क्रेस्ट के प्रोजेक्ट डायरेक्टर सुखविंदर सिंह अबरोल, साहिल कुक्कड़, पूर्व बैंक मैनेजर अभय कुमार, बैंक ऑथोराइजर सीमा धीमान और कारोबारी विक्रम वाधवा को गिरफ्तार किया जा चुका है। इसके अलावा अभिषेक सिंगला, स्वाति सिंगला, रिभव ऋषि, अंकुर और हरियाणा पावर जेनरेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड के डायरेक्टर फाइनेंस अमित दिवान की भी गिरफ्तारी हो चुकी है। वहीं नगर निगम का अकाउंटेंट अनुभव मिश्रा अभी भी फरार है, जिसकी तलाश जारी है।

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