राहुल गांधी ने यह बयान कांग्रेस संसदीय दल (CPP) की अध्यक्ष सोनिया गांधी के हाल ही में लिखे गए एक लेख के समर्थन में दिया।
कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शनिवार को केंद्र सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारत धीरे-धीरे इजराइल के रणनीतिक प्रभाव (Strategic Orbit) में जाता दिखाई दे रहा है, जबकि दुनिया के कई देश अब इजराइल से दूरी बना रहे हैं।
राहुल गांधी ने यह बयान कांग्रेस संसदीय दल (CPP) की अध्यक्ष सोनिया गांधी के हाल ही में लिखे गए एक लेख के समर्थन में दिया। सोनिया गांधी ने अपने लेख में भारत से स्वतंत्र विदेश नीति अपनाने, मानवीय मूल्यों की रक्षा करने और गाजा में जारी हिंसा पर स्पष्ट और मजबूत रुख अपनाने की अपील की थी।
राहुल गांधी ने क्या कहा?
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि भारत को अपनी स्वतंत्र विदेश नीति फिर से मजबूत करनी चाहिए और गाजा में हो रही मानवीय त्रासदी पर खुलकर बोलना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत ऐसे समय में इजराइल के और करीब जा रहा है, जब दुनिया के कई देश इजराइल की नीतियों की आलोचना कर रहे हैं। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इजराइल दौरे का भी उल्लेख करते हुए कहा कि इतिहास इसे एक चौंकाने वाले रणनीतिक फैसले के रूप में याद करेगा। राहुल गांधी ने आगे कहा कि भारतीय संस्कृति और देश की सोच यह मांग करती है कि भारत फिलिस्तीनी लोगों, खासकर उन बच्चों और परिवारों के लिए आवाज उठाए जो युद्ध और हिंसा का सबसे ज्यादा नुकसान झेल रहे हैं।
खड़गे ने भी सरकार को घेरा
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी सोनिया गांधी के लेख का समर्थन करते हुए कहा कि मौजूदा विदेश नीति की वजह से भारत ने फिलिस्तीन, ईरान और पश्चिम एशिया के कई पुराने मित्र देशों के बीच अपनी पारंपरिक पहचान कमजोर कर दी है। उन्होंने कहा कि भारत अब वैश्विक जनमत (Global Public Opinion) से भी दूर होता जा रहा है। खड़गे के अनुसार, गाजा में फिलिस्तीनी नागरिकों की पीड़ा पर केंद्र सरकार की चुप्पी चिंता का विषय है।
सोनिया गांधी ने क्या लिखा?
सोनिया गांधी ने अपने लेख में गाजा और वेस्ट बैंक में जारी मानवीय संकट पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि भारत की विदेश नीति हमेशा शांति, न्याय और मानवीय मूल्यों पर आधारित रही है, लेकिन मौजूदा सरकार इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से अपनी स्पष्ट राय रखने से बच रही है। उन्होंने कहा कि भारत को गाजा में हो रही हिंसा, फिलिस्तीनी परिवारों के विस्थापन और आम नागरिकों की मौतों पर खुलकर अपनी बात रखनी चाहिए। उनके अनुसार, सरकार की लगातार चुप्पी न तो भारत के राष्ट्रीय हितों के अनुरूप है और न ही उसकी नैतिक परंपराओं के।
गाजा में लगातार बिगड़ रहे हैं हालात
फिलिस्तीनी स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, 20 जून को गाजा में इजराइली हमलों में कम से कम छह लोगों की मौत हुई, जिनमें दो बच्चे और अल जजीरा का एक कैमरामैन भी शामिल था। फिलिस्तीनी स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि आर्थिक संकट, संसाधनों की भारी कमी और लगातार जारी संघर्ष के कारण वहां की स्वास्थ्य व्यवस्था लगभग टूटने की स्थिति में पहुंच गई है। अस्पतालों में दवाइयों और जरूरी मेडिकल उपकरणों की कमी है, जिससे हजारों मरीजों की जान खतरे में है। फिलिस्तीनी प्रशासन ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय, राहत संगठनों और दानदाता देशों से अपील की है कि वे तुरंत मदद करें ताकि स्वास्थ्य सेवाओं को बचाया जा सके और लोगों को जरूरी इलाज मिल सके।
कांग्रेस की मुख्य मांग
कांग्रेस का कहना है कि भारत को अपनी पारंपरिक स्वतंत्र विदेश नीति पर लौटना चाहिए, गाजा में हो रहे मानवीय संकट पर स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए और फिलिस्तीनी नागरिकों के अधिकारों तथा शांति की दिशा में खुलकर आवाज उठानी चाहिए।