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US का दौर खत्म, अब खाड़ी देशों में उसके बेस सुरक्षित नहीं रहेंगे… बातचीत के बीच खामेनेई की धमकी

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ईरान के सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई ने कहा है कि मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य ठिकाने अब सुरक्षित नहीं रहेंगे.

ईरान के सर्वोच्च नेता मुज्तबा खामेनेई ने अमेरिका और खाड़ी देशों को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा है कि अब खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने सुरक्षित नहीं रहेंगे. उनका कहना है कि अमेरिका को मिडिल ईस्ट में पहले जैसी सुरक्षित जगह अब नहीं मिलेगी. खामेनेई ने यह बयान ऐसे समय दिया है, जब ईरान और अमेरिका तीन महीने से चल रहे युद्ध को खत्म करने के लिए बातचीत कर रहे हैं.
खामेनेई ने यह संदेश अपने टेलीग्राम चैनल पर लिखित रूप में जारी किया. उन्होंने अमेरिका और इजराइल के खिलाफ हुई लड़ाई को इस्लामिक रेजिस्टेंस की जीत बताया. उन्होंने कहा कि इजराइल अपने बुरे अंत के करीब पहुंच रहा है. खामेनेई ने कहा कि अमेरिका मुर्दाबाद और इजराइल मुर्दाबाद इस्लामी दुनिया का नारा बना रहेगा. उन्होंने मुस्लिम देशों से एकजुट होने की अपील भी की. खामेनेई ने ईरानी हज यात्रियों से कहा कि वे दुनिया भर के मुसलमानों तक ईरान की जीत का संदेश पहुंचाएं.

दोहा में चल रही US-ईरान की बातचीत

खामेनेने कहा कि इस्लामिक देशों को मिलकर एक नया क्षेत्रीय ढांचा तैयार करना चाहिए. यह बयान उस समय आया है, जब ईरान के अधिकारी कतर की राजधानी दोहा में अमेरिका के साथ बातचीत कर रहे हैं. दोनों देश युद्ध खत्म करने के लिए समझौते की कोशिश कर रहे हैं. हालांकि अमेरिका और ईरान दोनों ने कहा है कि अभी जल्द किसी बड़े समझौते की उम्मीद नहीं है.
56 साल के मुज्तबा खामेनेई को 8 मार्च को ईरान का सर्वोच्च नेता बनाया गया था. इसके बाद से वह सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं. वह सिर्फ लिखित बयान जारी कर रहे हैं. हालिया हमलों में घायल होने के बाद उनकी सेहत को लेकर भी कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं.

अमेरिका ने दक्षिणी ईरान में हमले किए

खामेनेई के बयान से कुछ घंटे पहले अमेरिकी सेना ने दक्षिणी ईरान में मिसाइल ठिकानों और समुद्र में माइंस बिछाने की कोशिश कर रही नौकाओं पर हमला किया था. अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई क्षेत्रीय सुरक्षा बनाए रखने के लिए की गई.
दोनों देशों के बीच 8 अप्रैल से संघर्ष विराम लागू है, लेकिन हालिया हमलों के बाद यह सीजफायर कमजोर होता दिख रहा है. युद्ध के दौरान मिडिल ईस्ट में मौजूद कई अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ईरान समर्थित हमले भी हुए थे.

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