Sunday, July 19, 2026
spot_imgspot_imgspot_img

लोकसभा में नहीं पास हो सका महिला आरक्षण बिल, विपक्ष ने हक में नहीं डाले वोट

संसद के विशेष सत्र के दौरान महिला आरक्षण से जुड़ा 131वां संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में पास नहीं हो पाया।

शुक्रवार को हुई वोटिंग में यह बिल जरूरी दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका, जिससे महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को लेकर उठी उम्मीदों को झटका लगा है।
बहुमत से 54 वोट पड़े कम 
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के अनुसार, इस बिल पर कुल 528 वोट डाले गए। इनमें से 298 सांसदों ने समर्थन किया और 230 ने विरोध में वोट दिया। बिल को पास होने के लिए 352 वोटों की जरूरत थी, लेकिन यह 54 वोट कम रह गया। पहले चरण की वोटिंग में 489 वोट पड़े थे, जिनमें 278 पक्ष में और 211 विपक्ष में थे।
सत्ता पक्ष और विपक्ष में तीखी बहस
वोटिंग से पहले सदन में इस मुद्दे पर जोरदार बहस हुई। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सभी राजनीतिक दलों से इस बिल का समर्थन करने की अपील की। वहीं विपक्षी दलों ने इस प्रस्ताव पर कई गंभीर सवाल उठाए और इसे मौजूदा स्वरूप में स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
परिसीमन पर अमित शाह का तर्क
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि देश में अलग-अलग संसदीय क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या में बहुत बड़ा अंतर है। कुछ क्षेत्रों में लाखों मतदाता और कुछ में बहुत कम हैं। उनका कहना था कि इसी असमानता को दूर करने के लिए परिसीमन जरूरी है, ताकि सांसद अपने क्षेत्र के लोगों से बेहतर तरीके से जुड़ सकें।
राहुल गांधी ने बिल को बताया ‘छलावा’
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस विधेयक का कड़ा विरोध किया। उन्होंने इसे छलावा बताते हुए कहा कि यह वास्तव में महिलाओं के हित में नहीं है। इस बिल के जरिए असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश की जा रही है और इसके पीछे राजनीतिक रणनीति छिपी है।
प्रियंका गांधी ने भी जताई आपत्ति
कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने कहा कि उनकी पार्टी महिलाओं को आरक्षण देने के खिलाफ नहीं है, लेकिन इस बिल को लागू करने का तरीका सही नहीं है। उन्होंने खास तौर पर पुरानी जनगणना के आधार पर परिसीमन और ओबीसी वर्ग को शामिल न करने पर सवाल उठाए। उन्होंने इस विधेयक को संविधान की भावना के खिलाफ बताते हुए कहा कि इसका पास न होना लोकतंत्र के लिए सकारात्मक संकेत है।
सरकार और विपक्ष के अलग-अलग नजरिए
जहां सरकार इस बिल को महिलाओं को राजनीति में अधिक प्रतिनिधित्व देने की दिशा में बड़ा कदम मान रही थी। वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक बदलाव और चुनावी समीकरणों से जुड़ा मुद्दा बता रहा है।
क्या है इसका असर
बिल के पास न होने से फिलहाल महिला आरक्षण का मुद्दा आगे नहीं बढ़ पाया है। हालांकि, इस विषय पर बहस जारी रहने की संभावना है और भविष्य में इसे नए रूप में फिर से पेश किया जा सकता है।
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Punjab News