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इजराइल और अमेरिका में बढ़ रही तनातनी, नेतन्याहू ने कहा- उनकी मदद नहीं चाहिए, जरूरत पड़ी तो फिर ईरान पर हमला करेंगे

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पीएम नेतन्याहू ने कहा कि इजराइल की मौजूदा आर्थिक स्थिति मजबूत होने के कारण बाहरी फंडिंग न के बराबर है.

अमेरिका और इजराइल के बीच दोस्ती जगजाहिर है. लेकिन ईरान के साथ संघर्ष और शांति समझौते को लेकर चल रही बातचीत से इजराइल की अमेरिका से दूरी बनती दिख रही है. हालत यह हो गई है कि अमेरिका के साथ इजराइल के रिश्ते सामान्य नहीं रह गए हैं. दोनों के बीच तल्खी दिख रही है. इजराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि अब हमें अमेरिका की मदद नहीं चाहिए. साथ ही यह भी कहा कि जरूरत पड़ी तो हम तीसरी बार भी ईरान में घुसेंगे.
अपने देश की सशक्त आर्थिक आत्मनिर्भरता पर जोर देते हुए, इजराइल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी आर्थिक मदद को खत्म करने के मकसद से एक बड़ी नीतिगत बदलाव का ऐलान किया. उन्होंने कहा कि हमारे देश की मजबूत अर्थव्यवस्था को अब किसी विदेशी मदद की जरूरत नहीं है. वाशिंगटन के साथ वित्तीय संबंधों पर बात करते हुए पीएम नेतन्याहू ने कहा, “मैं अमेरिकी मदद बंद करना चाहता हूं. यह कल्याणकारी मदद की तरह है. मुझे यह नहीं चाहिए.”

हमारी अर्थव्यवस्था अब छोटी नहीं रहीः PM नेतन्याहू

पीएम नेतन्याहू ने इस बात पर जोर दिया कि इजराइल की मौजूदा आर्थिक स्थिति मजबूत होने के कारण बाहरी फंडिंग न के बराबर है. उन्होंने कहा, “हमारी अर्थव्यवस्था अब छोटी अर्थव्यवस्था नहीं रही. हम अमेरिका से मिलने वाली अपनी GDP के एक छोटे से हिस्से से खुद को फंड कर सकते हैं. मैं चाहता हूं कि यह प्रक्रिया इसी साल से शुरू कर दी जाए.”
प्रधानमंत्री ने खाड़ी क्षेत्र में क्षेत्रीय और संप्रभुता से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी राय रखी. फिलिस्तीन को देश का दर्जा दिए जाने के प्रति अपनी सरकार के कड़े विरोध को फिर से दोहराया. उन्होंने कहा, “इजराइल यहूदी लोगों का देश है. यहां कोई फिलिस्तीनी राज्य नहीं बनेगा.” उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा पर आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा कि सेना बाहरी दुश्मनों के खिलाफ सक्रिय रुख बनाए रखेगी. उन्होंने कहा, “हम एक सक्रिय सुरक्षा नीति अपनाएंगे – हम बस बाड़ के पीछे बैठकर इंतजार नहीं करेंगे.”

 तीसरी बार भी ईरान पर हमला करेंगेः नेतन्याहू

क्षेत्रीय खतरों के खिलाफ इजराइल के लगातार अभियानों का जिक्र करते हुए, प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने तेहरान के परमाणु और सैन्य बुनियादी ढांचे के खिलाफ सीमा-पार पहले से हमला करने की सीधी चेतावनी दी. उन्होंने कहा, “हम खुद को बर्बादी से बचाने के लिए 2 बार ईरान के अंदर घुसे. अगर जरूरत पड़ी तो हम तीसरी बार भी ऐसा ही करेंगे.”
 लेबनान को लेकर नेतन्याहू ने यह भी पुष्टि की कि इजराइली रक्षा बल दुश्मन गुटों का मुकाबला करने के लिए लेबनान के इलाके में अपनी ऑपरेशनल स्थिति बनाए रखेंगे. उन्होंने समझाया, “हमने अभी लेबनान नहीं छोड़ा है. हमने लेबनान सरकार की सहमति से उस देश के अंदर करीब 10 किलोमीटर तक एक सुरक्षा घेरा बनाया है. लेकिन इस वजह से हिज़्बुल्लाह खासा नाराज है. ईरान का भी यही हाल है.”
उत्तरी क्षेत्र में सैनिकों की तैनाती का जायजा लेने के दौरान, पीएम नेतन्याहू ने दोहराया कि जब तक सीमा-पार के खतरों को खत्म नहीं कर दिया जाता, तब तक वहां पर सेना की मौजूदगी बनी रहेगी. उन्होंने वहां मौजूद सैनिकों से कहा, “हमारा रुख साफ है. जब तक खतरा खत्म नहीं हो जाता, हम दक्षिणी लेबनान नहीं छोड़ने जा रहे. हिज़्बुल्लाह हथियारबंद होकर यहां मौजूद है और हमें धमका रहा है, ऐसे में हम यहीं पर बने रहेंगे.”

गाजा पट्टी में इजराइली बस्तियों के बसाने पर चुप्पी

साथ ही उनकी ओर से यह घोषणा बेरूत और तेल अवीव के बीच वाशिंगटन की मध्यस्थता में हुए एक फ्रेमवर्क समझौते पर हाल ही में हस्ताक्षर के बाद की गई है, जिसका मकसद लंबे समय तक स्थिरता कायम करना और ईरान समर्थित शिया मिलिशिया का सैन्यीकरण खत्म करना है. राजनयिक समझौते की शर्तों के तहत, इजराइली सुरक्षा बलों द्वारा सैनिकों की किसी भी संभावित वापसी का दारोमदार पूरी तरह से इस बात पर है कि लेबनान सरकार सफलतापूर्वक ऐसे विशेष ऑपरेशनल क्षेत्र स्थापित करे जहां देश की सेना सुरक्षा का नियंत्रण अपने हाथ में ले ले.
हालांकि जब गाजा पट्टी में इजराइली बस्तियों को फिर से बसाने की संभावना से जुड़ा सवाल पूछा गया, तो प्रधानमंत्री ने सोची-समझी कूटनीतिक चुप्पी साधे रखी. उन्होंने कहा, “गाजा में बस्तियों को फिर से बसाने के मामले में, आपको पहले काम करने और बाद में बात करने के लिए तैयार रहना होगा. कभी-कभी दोनों को अलग रखना बेहतर होता है. इसीलिए मैं इस विषय पर और कुछ नहीं कहूंगा.”

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