पंजाब कांग्रेस के भीतर जारी सियासी बगावत अभी थमती नजर नहीं आ रही है।
पार्टी नेतृत्व की ओर से मतभेद खत्म करने की कोशिशों के बावजूद पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने पंजाब मामलों के प्रभारी भूपेश बघेल से सीधे मुलाकात नहीं की। बघेल का पांच दिन का दौरा, जो आज (10 जुलाई) खत्म होने वाला है, उसे तीन दिन और बढ़ाया जा सकता है।
मुलाकात से पहले चन्नी समर्थकों ने रखीं 2 अहम शर्तें
सूत्रों के अनुसार, चन्नी समर्थक नेताओं ने बातचीत के लिए दो स्पष्ट शर्तें रखी हैं। पहली, बैठक कांग्रेस भवन में आयोजित न हो और दूसरी, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग बैठक का हिस्सा न हों। बताया जा रहा है कि चन्नी की ओर से दो वरिष्ठ नेता प्रभारी से मुलाकात कर सकते हैं, जिनमें सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा का नाम प्रमुख है।
हाईकमान पर दबाव बनाने की रणनीति नहीं आई काम
राजनीतिक घटनाक्रम से संकेत मिल रहे हैं कि शुरुआती दिनों में चन्नी गुट ने पार्टी नेतृत्व पर दबाव बनाने की कोशिश की, लेकिन वह ज्यादा असरदार साबित नहीं हुई। दूसरी ओर, राजा वड़िंग लगातार संगठनात्मक सक्रियता दिखाते रहे, जिससे उनकी स्थिति पहले की तुलना में अधिक मजबूत मानी जा रही है।
राहुल गांधी से सीधे मुलाकात की तैयारी
चन्नी के करीबी नेताओं का कहना है कि उनका अगला बड़ा कदम राहुल गांधी से मुलाकात के बाद ही तय होगा। उनका मानना है कि यदि भविष्य में संगठन या चुनावी जिम्मेदारी को लेकर कोई फैसला होता है तो उस पर अंतिम सहमति सीधे राहुल गांधी से मिलनी चाहिए। इसी कारण चन्नी फिलहाल दिल्ली में शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात का इंतजार कर रहे हैं।