Sunday, August 9, 2026
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आम आदमी को लगा ‘करेंसी’ का करंट! डॉलर के मुकाबले रुपया पहली बार 93 के पार

इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज में, लोकल करेंसी डॉलर के मुकाबले 92.92 पर खुली.

भले ही शुक्रवार को शेयर बाजार में तेजी देखने को मिल रही हो, लेकिन करेंसी मार्केट में बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है. खास बात तो ये है कि डॉलर के मुकाबले में रुपया पहली बार 93 के लेवल को पार कर गया है. उसका कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली को माना जा रहा है. रुपए में इस गिरावट की वजह से इंपोर्टेड महंगाई में इजाफा देखने को मिल सकता है. इसका मतलब है कि विदेशी सामान की कीमतों में तेजी देखने को मिल सकती है.

साथ ही विदेशी में पढ़ाई के साथ फॉरेन ट्रिप भी महंगा होगा. इसका असर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी देखने को मिल सकता है. फॉरेक्स ट्रेडर्स के मुताबिक, कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में बढ़ोतरी से स्थानीय मुद्रा पर और दबाव पड़ा, जबकि घरेलू शेयर बाज़ारों में सकारात्मक शुरुआत ने इसे और ज़्यादा गिरने से कुछ हद तक बचा लिया. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर करेंसी मार्केट में किस तरह के आंकड़े को देखने को मिल रहे हैं.

पहली बार डॉलर 93 के पार

इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज में, लोकल करेंसी डॉलर के मुकाबले 92.92 पर खुली. इसके बाद यह पहली बार 93 का आंकड़ा पार कर 93.08 पर कारोबार करने लगी, जो इसके पिछले बंद भाव से 19 पैसे कम था. बुधवार को रुपया 49 पैसे गिरकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने रिकॉर्ड निचले स्तर 92.89 पर बंद हुआ था. गुड़ी पड़वा के कारण गुरुवार को फॉरेक्स बाज़ार बंद थे. अनिल कुमार भंसाली, हेड ऑफ़ ट्रेजरी और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर, Finrex Treasury Advisors LLP ने कहा, “रुपया कमज़ोर दिख रहा है; RBI ही एकमात्र ऐसी संस्था है जो डॉलर बेचकर इसे और गिरने से बचा रही है. गुरुवार को जब सेंसेक्स और निफ्टी 21 महीने के निचले स्तर पर गिरे, तब FPIs (विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों) ने बिकवाली की.

डॉलर इंडेक्स में आई तेजी

इस बीच, डॉलर इंडेक्स – जो छह मुद्राओं की एक टोकरी के मुकाबले डॉलर की मजबूती को मापता है – 0.17 प्रतिशत बढ़कर 100.25 पर कारोबार कर रहा था. वहीं दूसरी ओर इंटरनेशनल मार्केट में ब्रेंट क्रूड, वायदा कारोबार में 1.64 प्रतिशत गिरकर 106.9 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था. जबकि एक दिन पहले कच्चे तेल की कीमतें 119 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गए थे. घरेलू शेयर बाज़ार की बात करें तो, सेंसेक्स गुरुवार की भारी गिरावट से उबरते हुए 960.67 अंक या 1.29 प्रतिशत बढ़कर 75,167.91 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 311.50 अंक या 1.35 प्रतिशत बढ़कर 23,313.65 पर पहुंच गया. एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने गुरुवार को शुद्ध आधार पर 7,558.19 करोड़ रुपये के शेयर बेचे.

रुपए में राहत के कोई आसार नहीं

यूरोप के प्रमुख देशों और जापान ने होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों के सुरक्षित गुज़रने के लिए किए जा रहे प्रयासों में शामिल होने की पेशकश की है, और अमेरिका ने तेल की आपूर्ति बढ़ाने के लिए कुछ कदम उठाने की रूपरेखा तैयार की है. रुपए पर बना दबाव निकट भविष्य में कम होने की संभावना नहीं है, क्योंकि तेल की कीमतों में अचानक उछाल की चिंताओं के चलते विदेशी निवेशकों ने मार्च महीने में अब तक स्थानीय शेयरों से 8 अरब डॉलर से ज़्यादा की रकम निकाल ली है; यह जनवरी 2025 के बाद से किसी एक महीने में हुई सबसे बड़ी निकासी है. अर्थशास्त्रियों का कहना है कि ऊर्जा की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी भारत की आर्थिक वृद्धि को नुकसान पहुंचा सकती है और महंगाई को बढ़ा सकती है.
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