ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव तथा पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर अब भारत की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जेब पर दिखाई देने लगा है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जिसके कारण देश में पेट्रोल, डीजल और गैस सिलेंडर महंगे होते जा रहे हैं। बढ़ती महंगाई को लेकर केंद्र सरकार भी सतर्क नजर आ रही है। हाल के दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में दो बार बढ़ोतरी की जा चुकी है। सबसे पहले 15 मई को तेल कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल के दाम में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी। इसके बाद 19 मई को फिर से 90 पैसे प्रति लीटर कीमत बढ़ा दी गई। लगातार बढ़ रही कीमतों का सीधा असर आम लोगों के दैनिक खर्च पर पड़ रहा है।
अब घरेलू गैस सिलेंडर के दाम बढ़ने की आशंका
कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में पहले ही बड़ी बढ़ोतरी हो चुकी है। महीने की शुरुआत में ही कमर्शियल सिलेंडर करीब 993 रुपये महंगा किया गया था, जिसके बाद इसकी कीमत 3000 रुपये के पार पहुंच गई है। अब माना जा रहा है कि घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम भी जल्द बढ़ सकते हैं। घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत में आखिरी बार मार्च महीने में 60 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी। उसके बाद से कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगातार बढ़ते कच्चे तेल के दामों को देखते हुए तेल कंपनियां फिर से कीमतें बढ़ा सकती हैं।
कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 109 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी है। इसका असर भारत में ईंधन की कीमतों पर साफ दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ा, तो आने वाले दिनों में पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतों में और इजाफा हो सकता है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से तेल आयात करता है। इसलिए वैश्विक बाजार में तेल महंगा होने का असर सीधे देश के उपभोक्ताओं पर पड़ता है।
सरकार कर सकती है समीक्षा
आज शाम प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में होने वाली केंद्रीय मंत्रिपरिषद की बैठक में भी महंगाई और बढ़ती ईंधन कीमतों पर चर्चा होने की संभावना है। माना जा रहा है कि सरकार आम लोगों को राहत देने और जरूरी वस्तुओं की सप्लाई बनाए रखने को लेकर कुछ अहम निर्देश जारी कर सकती है।
हर महीने कैसे तय होती हैं गैस की कीमतें?
देश में एलपीजी और विमान ईंधन (ATF) की कीमतें हर महीने की पहली तारीख को तय की जाती हैं। सरकारी तेल कंपनियां जैसे Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum और Hindustan Petroleum अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत और रुपये-डॉलर की विनिमय दर के आधार पर नए रेट जारी करती हैं। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और ईरान से जुड़े हालात के कारण वैश्विक ऊर्जा सप्लाई प्रभावित हुई है। इसी वजह से दुनिया भर में तेल की कीमतों में तेजी आई है और भारत में भी ईंधन तथा गैस के दाम बढ़ रहे हैं।
आम लोगों पर बढ़ेगा बोझ
पेट्रोल, डीजल और गैस सिलेंडर की बढ़ती कीमतों का असर सिर्फ यात्रा या रसोई तक सीमित नहीं रहता। इससे खाने-पीने की चीजों, परिवहन और रोजमर्रा के सामान की लागत भी बढ़ जाती है। ऐसे में आने वाले दिनों में महंगाई और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।